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विश्व की भाषा के रूप मे हिन्दी के विकास की संभावना असीमित है।

विश्व की भाषा के रूप मे हिन्दी के विकास की संभावना असीमित है।

हिन्दी भाषी जन समुदाए विश्व की तीन बृहत भाषायी समूहो मे से एक है।

नेपाल, मौरिशस, त्रिनिदाद, फ़िजी, सूरीनाम, की हिन्दी भाषी जनता के अतिरिक्त विश्व के अनेक भागो मे यथा दक्षिणी व पूर्वी अफ्रीका, बर्मा आदि मे बसे लोग हिन्दी बोलते है।

गियाना की भाषा मे हिन्दी का पुट मिलता है।

ब्रिटेन मे लंदन कैंब्रिज और यार्क विश्वविद्यालयो, अम्रीका मे शिकागो, कैलिफोर्निया, बिसकनसीन, कोलंबिया, पेंसिलवेनिया, वॉशिंग्टन, टेक्सास तथा वर्जीनिया आदि विश्वविद्यालयो मे, अर्जेंटीना मे यूनिवेर्सिटी  ऑफ ब्यूनोस आइरेस, पेरिस मे सारवान विश्वविद्यालया तथा अन्य छ: संस्थाओ मे, पूर्व मे मार्टिन लूथर किंग विश्वविद्याल्य, जापान मे टोकियो तथा ओसाका के दो विश्वविद्यालय, बुल्गारिया के सोफिया विश्वविद्यालय मे हिन्दी के अध्ययन की व्यवस्था है।

सोवियट संघ के मॉस्को, ताशकंद आदि नगर ओमे हिन्दी का अध्ययन- अध्यापन और अनुवाद कार्य जोरों से चल रहा है।  "सोवियट भूमि" "सोवियट नारी" आदि अनेक पत्रिकाए हिन्दी मे प्रकाशित की जा रही है। दक्षिण अवफ्रिका मे अँग्रेजी विश्वविद्यालयो मे कक्षा दो से हिन्दी का अध्यापन शुरू किया गया है। वहा डरबन बेस्ट फील्ड यूनिवरसिटि मे हिन्दी के अध्यापन की व्यवस्था है। ऑस्ट्रेलिया, श्री लंका, बंलादेश आदि मे हिन्दी की लोगप्रियता बढ़ती जा रही है। यह तथ्य भी उल्लेखनीय है की यूनेस्को की प्रमुख की प्रमुख पत्रिका "यूनेस्को कूरियर" का प्रकाशन "यूनेस्को दूत" नाम से हिन्दी मे भी होता है। हिन्दी भाषियों की उत्तरदाइतयवा है की संयुक्त राष्ट्र संघ मे मान्यता प्राप्त भाषाओ अँग्रेजी, हिन्दी, स्पेन, फ्रांसिस, रूसी, चीनी और अरबी के समान हिन्दी को भी यथोचित स्थान दिलवाने के लिए प्रयत्नशील रहे है।    

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हिन्दी पखवाड़ा समारोह(दिनाँक १४-०९-२०१3 से २८-०९-२०१3

आधुनिक युग मे हिन्दी भाषा की स्थिति

संसार मे हिन्दी भाषा भाषियो की संख्या, चाइनिज और अँग्रेजी छोड़कर, सर्वाधिक है। व्यापार, रेडियो, दूरदर्शन फिल्म आदि माध्यमों से हिन्दी की तेजी से विकाश ऐवम विस्तार मे मदद मिल रही है। सिक्षितों का बढ़ता अनुताप और रोजगार के वृहद अवसर भी कामकाजी हिन्दी के विकाश मे सहायक हुए है। सुखद है की हिन्दी के समाचार पत्रो एवम अन्य साहित्य के प्रकाशनों के भारत मे पाठको की संख्या सर्वाधिक है।

सूचना और संचार क्रांति मे हिन्दी के विकास और प्रचार मे बहुत योगदान दिया है। फिल्मों और दूरदर्शन के माध्यम से हिन्दी आप्रवासी भारतीयो मे लोकप्रिय हो रही है। एलेक्ट्रोनिक तथा प्रिंट मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोग हिन्दी को जानने व समझने लगे है।

सूचना विस्फोट के वर्तमान परिदृश्य से मे हिन्दी का प्रचार निरंतर बढ़ रहा है। कम्प्युटर ने प्रयोजनमूलक हिन्दी के लिए संभावना की अनंत द्वार खोल दिये है। दूसरी ओर इस युग की बहुत बड़ी उपलब्धि, इंटरनेट ने सारे विश्व मे फैले कम्प्युटर जाल को एक जुट किया है, इंटरनेट पर हिन्दी के कई वैबसाइट है। हिन्दी के अनेक समाचार् पत्र और पत्रिकाए,पुस्तके,साहित्य की जानकारी भी उपलब्ध है। भारत सरकार तथा गैर सरकारी कंपनियो ने हिन्दी मे सुचारु रूप से इंटरनेट चलाने के लिए अनेक सॉफ्टवेर विकसित कर डाले है। इंटरनेट पर हिन्दी के शिक्षण और प्रशिक्षण की ब्यावस्था भी है।

इतना ही नहीं, विश्व के अधिकांश विश्वविद्यालयो मे हिन्दी पढ़ाई जा रही है। हिन्दी ग्रंथो का हिन्दी के प्रचार के लिए अनेक देशी व विदेशी संस्थाए विश्व भर मे कार्यरत है। अंतर्राष्ट्रीय रेडियो और टीवी हिन्दी मे सेवारत है। अम्रीका मे हिन्दी के शिक्षण की व्यबस्था की गई है। हर वर्ष विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाने लगा है। अम्रीका, इंग्लैंड, मॉरीशस, श्रीलंका, जैसे देशो मे हिन्दी साहित्य सम्मेलन आयोजित किए जाते है। बहुराष्ट्रीय कोंपनियों मे काम करने के इच्छुक युवको को हिन्दी सीखने की जरूरत महसूस होने लगे है। कुल मिलाकर देखा जाए तो देश और विदेश मे भी हिन्दी के प्रचार के लिए काफी काम हो रहा है और उसके बेतहाशा विकसित होने की समभावनए बनी हुई है।

हिन्दी ही भारत की एकमात्र ऐसी भाषा है जो सम्मपूर्ण देश मे सबसे अधिक बोली, लिखी एवम समझी जाती है। स्वतन्त्रता आंदोलन के समय से ही हिन्दी आम जनता की भाषा रही है। यह भी सिद्ध हो चुका है की हिन्दी एक वैज्ञानिक तथा समृद्ध भाषा है। तो क्यू न हम भी इस्स भाषा के प्रचार मे अपना योगदान दे????

अंत मे मे गांधी जी द्वारा हिन्दी के विषय मे काही गई एक पंक्ति से अपना भाषण खत्म करना चाहूँगा ,” हिन्दी एकता की कुंजी, वह प्रेम का रज्जु है, उसमे सारे देश की शक्ति निहित है, उसके बिना राष्ट्र अधूरा और गूंगा रहेगा।

धन्यवाद।

रामानुज दास

कक्षा १०(अ)

 

 

 

 
 
 
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